29 सितंबर- मंदीप कौर
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला, उपमंडल स्तरीय अस्पतालों तथा सीएचसी, पीएचसी व सब-सेंटर्स को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर लाने का कार्य शीघ्रता से पूरा किया जाए। इसके लिए मरीज के पंजीकरण से लेकर उसके सभी प्रकार के टेस्ट, चिकित्सकीय परामर्श और दवाई देने तक के कार्यों को रियल टाइम दर्ज किया जाए ताकि अस्पतालों की सभी गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सके।
खराब उपकरण तुरंत ठीक करवाए जाएं:
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में लगाए गए उपकरणों का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यदि कोई उपकरण खराब हो जाता है तो उसे उसी दिन ठीक करवाया जाए ताकि मरीजों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। यदि उपकरण सरकारी कर्मचारी की लापरवाही से खराब होता है अथवा वह लंबे समय तक ठीक नहीं करवाया जाता है तो उसके लिए संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में कैथ लैब खोलने के लिए जल्द टेंडर करने के निर्देश भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए।
एचआईवी टास्क फोर्स की प्रगति की समीक्षा मुख्यमंत्री स्वयं करेंगे:
मुख्यमंत्री ने जिला स्तरीय एचआईवी टास्क फोर्स की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि इस कार्य की समीक्षा प्रत्येक चार महीने में वे स्वयं करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में उपायुक्त की अध्यक्षता में भी हर दो माह बाद इस कार्य की समीक्षा अवश्य की जाए ताकि टास्क फोर्स का कार्य प्रभावशाली ढंग से संचालित हो सके। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से उपायुक्त व मुख्यमंत्री के स्तर पर आयोजित की जाने वाली बैठकों का एजेंडा निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने हांसी अस्पताल को जिला अस्पताल के रूप में अपग्रेड करने के संबंध में भी विशेष दिशा-निर्देश दिए।
हर जिला में 1 नवबंर तक अमृत फार्मेसी खोलने का लक्ष्य दिया:
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में अमृत फार्मेसी खोलने का कार्य एक नवंबर तक अवश्य पूरा कर लिया जाए। उन्होंने उन अस्पतालों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के भी निर्देश दिए जहां आयुष्मान भारत व चिरायु योजना के मरीजों के क्लेम औसत से कम आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिला में सीएमजीजीए को अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर निगरानी और उसमें सुधार के सुझाव देने के लिए निर्देशित करने को भी कहा।
मुख्यमंत्री ने मरीजों को राहत देने के लिए ई-उपचार के उपयोग, नशा मुक्ति केंद्रों के प्रभावी संचालन, आयुष्मान व चिरायु योजना के पात्र व्यक्यिों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए विशेष अभियान चलाने, अस्पतालों में साफ-सफाई के कार्यों पर विशेष ध्यान देने, आयुष्मान क्लेम की निगरानी हेतु नियमित रिपोर्टिंग करने, निजी व सरकारी अस्पतालों में पैकेजवार तुलना सहित स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए पिछली बैठक में दिए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विभाग द्वारा किए गए कार्यों की भी समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
ये रहे उपस्थित:
बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमित मिश्रा, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के सचिव श्री सीजी रजनीकांथन, निदेशक श्री धीरेंद्र खड़गटा, मुख्यमंत्री के उप-प्रधान सचिव डॉ. यशपाल सिंह, स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल, एनएचएम के प्रबंध निदेशक डॉ. रिपुदमन सिंह ढिल्लों तथा डॉ. मनोज कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

