डिप्टी कमिश्नर ने जिले में नशा पीड़ितों के पुनर्वास की प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया

पंजाब स्वास्थ्य

डिप्टी कमिश्नर ने जिले में नशा पीड़ितों के पुनर्वास की प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया

अधिकारियों को रोजगार पाने में मदद के लिए नशा छोड़ चुके व्यक्तियों के रुझान के अनुसार कौशल विकास कोर्स शुरू करने को कहा

जालंधर, 19 मार्च:
पंजाब सरकार द्वारा नशे के ख़ात्मे के लिए ‘युद्ध नशे के विरुद्ध ‘ अभियान तहत
डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल ने जिले में नशे के आदी लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और मजबूत करने पर जोर दिया।
यहां जिला प्रशासकीय परिसर में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर(ज) अपर्णा एमबी, सिविल सर्जन डा. गुरमीत लाल और स्वास्थ्य एवं रोजगार विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान डिप्टी कमिश्नर ने जिले में नशा पीड़ितों के पुनर्वास और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की।
डा.अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि नशे की लत से पीड़ित लोगों को उनके कौशल का परिचय देकर समाज में पुनः शामिल करने के लिए उनकी प्रवृत्ति के अनुसार कौशल विकास कोर्स शुरू किए जाने चाहिए ताकि ऐसे व्यक्तियों को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्म-निर्भर बनाया जा सके। उन्होंने जिला रोजगार एवं कारोबार ब्यूरो के अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया तुरंत शुरू करने का भी निर्देश दिया।
डिप्टी कमिश्नर ने नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की ढांचागत आवश्यकताओं और उनकी वर्तमान स्थिति का भी जायजा लिया। बैठक के दौरान नशा मुक्ति केंद्रों के बुनियादी ढांचे से संबंधित प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
राज्य में नशे की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि जिला प्रशासन जालंधर को नशा मुक्त बनाने के साथ-साथ नशे के आदी लोगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नशे के आदी लोगों की देखभाल, उपचार और पुनर्वास के प्रयासों में कोई कसर नहीं रहनी चाहिए।
बैठक के दौरान एस.डी.एम रणदीप सिंह हीर, जिला रोजगार एवं कारोबार ब्यूरो की उपनिदेशक नीलम महे, डा. अभयराज आदि भी मौजूद रहे।

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