‘सांझ राहत केंद्र’ महिलाओं की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस का सशक्त कम्युनिटी पुलिसिंग मॉडल बनकर उभरे

देश पंजाब

चंडीगढ़, 14 जुलाई 2026:एस के सक्सेना

महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए पंजाब पुलिस के ‘सांझ राहत केंद्र’ आज एक प्रभावी कम्युनिटी पुलिसिंग मॉडल के रूप में उभरकर सामने आए हैं। ये केंद्र संकटग्रस्त महिलाओं को हर प्रकार की सहायता, काउंसलिंग, आपात स्थिति में तत्काल मदद तथा पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

शुरुआत में मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना और जालंधर स्थित सांझ राहत केंद्रों में केवल दो प्रशिक्षित काउंसलर तैनात थे। अब इस पहल से कई काउंसलर जुड़ चुके हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान इन केंद्रों द्वारा 1,656 मामलों की स्क्रीनिंग की गई है तथा 1,069 मामले दर्ज किए गए हैं।

इस संबंध में पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “राज्य में संचालित चारों सांझ राहत केंद्र संकटग्रस्त महिलाओं को मानसिक आघात से उबरने और सामान्य जीवन पुनः शुरू करने में सहायता प्रदान कर रहे हैं। ऐसी पहलें विश्वास और सहयोग पर आधारित जन सुरक्षा के प्रति पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।”

डीजीपी ने कहा, “सांझ राहत केंद्रों की सफलता की अनेक कहानियां हैं, लेकिन मोहाली में घरेलू हिंसा की शिकार एक महिला को समय पर बचाया जाना पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। एक महिला ने सहायता के लिए संपर्क कर बताया कि उसका पति उसके साथ मारपीट कर रहा है और उसे जान से मारने की धमकी दे रहा है। उसे तत्काल सहायता की आवश्यकता थी। यह महिला पहली बार पंजाब पुलिस के संपर्क में नहीं आई थी, क्योंकि उससे संबंधित एक पुराना मामला पहले ही एसएएस नगर (मोहाली) टीम के रिकॉर्ड में दर्ज था। सांझ राहत केंद्र की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की, सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की और उसे सुरक्षित वातावरण में उसके मायके पहुंचाया।”

उन्होंने आगे कहा, “एक अन्य मामले में अकेली रह रही एक महिला को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सांझ राहत केंद्र की टीम ने उसकी काउंसलिंग की और उसे आवश्यक उपचार कराने के लिए प्रेरित किया। टीम ने उसे पीजीआई में भर्ती कराने में सहायता की तथा विशेष समन्वय के माध्यम से लगभग दो महीने तक उसका उपचार सुनिश्चित कराया। उपचार के दौरान उसका गर्भपात हो गया। इस कठिन समय में टीम ने निरंतर भावनात्मक सहयोग और काउंसलिंग के माध्यम से उसे इस संकट से उबरने में मदद की। स्वास्थ्य लाभ के बाद टीम ने उसे रोजगार दिलाने में भी सहायता की तथा उसके परिवार से पुनः जोड़ने का प्रयास किया, जिससे वह सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ अपना जीवन फिर से शुरू कर सकी।”

सांझ राहत केंद्रों के अतिरिक्त महिलाओं के कल्याण और सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस की कई अन्य पहलें भी प्रभावी सिद्ध हुई हैं। जागृति कार्यक्रम के तहत पंजाब पुलिस की महिला मित्रों ने पिछले लगभग दो वर्षों में 12,482 स्कूलों तक पहुंच बनाकर 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के 11,75,010 बच्चों को जागरूक किया। इसी अवधि के दौरान 76,299 प्राचार्यों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा अन्य स्टाफ सदस्यों को भी जागरूक किया गया।
महिला हेल्प डेस्क पहल के अंतर्गत पिछले पांच वर्षों में 69,329 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें साइबर अपराध, घरेलू हिंसा, बाल यौन शोषण, बाल विवाह निषेध कानून, किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, नशे तथा लैंगिक संवेदनशीलता जैसे विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।

गुरप्रीत कौर देओ, स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन) ने कहा, “वर्ष 2011 में स्थापना के बाद से ‘सांझ’ व्यवस्था ने पुलिस और जनता के बीच साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पंजाब के जिलों, उप-मंडलों तथा पुलिस थानों में स्थापित 530 से अधिक सांझ केंद्रों के सुदृढ़ नेटवर्क के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “यह पहल संकटग्रस्त महिलाओं को काउंसलिंग, पुलिस सहायता तथा कानूनी सहयोग उपलब्ध कराकर महिलाओं से संबंधित विभिन्न गंभीर समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।”

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