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चंडीगढ़, 3 जुलाई – हरियाणा सरकार ने संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और इसमें होने वाली देरी को खत्म करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने तहसील और उप-मंडल स्तर पर प्रत्येक पंजीकरण कार्यालय के लिए दैनिक पंजीकरण अपॉइंटमेंट की संख्या को अधिकतम 20 टोकन प्रति कार्यालय तक सीमित कर दिया है। यह नई टोकन-आधारित व्यवस्था 2 जुलाई, 2026 से पूरे राज्य में लागू हो गई है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी उपायुक्तों को इस संशोधित व्यवस्था की जानकारी देते हुए इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि इस नई प्रणाली के तहत, प्रत्येक जिला मुख्यालय तहसील में जिला राजस्व अधिकारी-सह-संयुक्त उप-पंजीयक के कार्यालय को प्रतिदिन यादृच्छिक (रैंडम) रूप से 20 टोकन आवंटित किए जाएंगे। इसी तरह, उप-मंडल स्तर पर उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (नागरिक)-सह-उप-पंजीयक के कार्यालय को भी रोजाना नियमित रूप से रैंडम आधार पर 20 टोकन जारी किए जाएंगे। हालांकि, उप-तहसील कार्यालयों में मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वह पहले की तरह ही चलती रहेगी।
डॉ मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि ये टोकन दैनिक और रैंडम आधार पर जेनरेट किए जाएंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य पक्षपात या वीआईपी ट्रीटमेंट को खत्म करना है ताकि सेल डीड (बिक्री विलेख) और अन्य संपत्ति दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए आने वाले सभी आवेदकों को समान अवसर मिल सके। इसके साथ ही, राजस्व अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे हर आवंटित टोकन का सम्मान करें और तय समय के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करना सुनिश्चित करें। यह निर्देश पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 और 18 के तहत अनिवार्य या वैकल्पिक पंजीकरण वाले सभी दस्तावेजों पर लागू होंगे।
डॉ सुमिता मिश्रा ने कहा कि इस टोकन-आधारित व्यवस्था से संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, अनुमानित और नागरिक-अनुकूल बनेगी, और इससे पंजीकरण कार्यालयों में लगने वाली भारी भीड़ में भी काफी कमी आएगी। इस सुधार से बिचौलियों और एजेंटों के प्रभाव पर भी रोक लगने की उम्मीद है, जो अक्सर आवेदकों को जल्दी अपॉइंटमेंट या प्राथमिकता दिलाने का झांसा देकर उनका शोषण करते हैं। रैंडम तरीके से जेनरेट होने वाले सीमित दैनिक अपॉइंटमेंट लागू करके सरकार का लक्ष्य एक निष्पक्ष और व्यवस्थित प्रणाली स्थापित करना है, जहां हर आवेदक के साथ समान व्यवहार हो सके।

