कावेलजीत सिंह
अमृतसर, कनाडा भेजे गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 200 से अधिक स्वरूपों को समुद्री कंटेनरों के माध्यम से भेजे जाने के मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय प्रवासी एवं एनआरआई के प्रमुख संगठन इंडस कनाडा फाउंडेशन (आईसीएफ) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। फाउंडेशन ने जोर देकर कहा है हाल ही में लागू किए गए जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट की भावना और प्रावधानों के अनुरूप इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
रविवार को कैलिफोर्निया, ब्रिटिश कोलंबिया, ओंटारियो, न्यूयॉर्क और लंदन के 16 सिख गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित एक ज़ूम बैठक के बाद मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आईसीएफ के अध्यक्ष विक्रम बाजवा ने कहा कि इन आरोपों से दुनिया भर में बसे सिखों और एनआरआई समुदाय में गहरी पीड़ा और चिंता है। उन्होंने कहा कि कनाडा और अमेरिका के कई सिख संगठनों ने सार्वजनिक रूप से इस बात पर आपत्ति जताई है कि पवित्र स्वरूपों को कई सप्ताह तक चलने वाली समुद्री यात्रा के दौरान कार्गो कंटेनरों में भेजा गया, जबकि हवाई मार्ग से भेजे जाने पर उनकी गरिमा, श्रद्धा और उचित देखभाल अधिक सुनिश्चित की जा सकती थी।
कैलिफोर्निया स्थित फेयरफील्ड सिख टेंपल के ज्वाईंट सेक्रेटरी दिलबाग संधू ने भी मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि जांच में यह पता लगाया जाए कि पवित्र स्वरूपों के ट्रांसपोर्टेशन के दौरान सिख धार्मिक मर्यादाओं तथा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और अकाल तख्त द्वारा निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। उन्होंने कहा कि बेअदबी कानून का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूपों के सम्मानजनक रखरखाव को भारत और विदेशों में और अधिक सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
फाउंडेशन ने यह भी मांग की कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि पवित्र स्वरूप कनाडा में किसी व्यक्ति के अनुरोध पर भेजे गए थे या फिर किसी मान्यता प्राप्त गुरुद्वारा संस्था के लिए सार्वजनिक स्थापना एवं सेवा के उद्देश्य से भेजे गए थे। फाउंडेशन का मानना है कि यदि इन स्वरूपों की मांग किसी स्थापित गुरुद्वारा संस्था द्वारा की गई होती, तो उनका परिवहन सिख परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप किया जाता तथाकथित बेअदबी की स्थिति से बचा जा सकता था।
फाउंडेशन ने यह भी आग्रह किया कि जांच के दौरान कनाडा में उन व्यक्तियों तथा संस्थाओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं, जिन्होंने इन पवित्र स्वरूपों की मांग की थी, ताकि पूरे मामले में जवाबदेही स्पष्ट हो सके और सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी तय की जा सके।
फाउंडेशन ने पंजाब सरकार से यह भी अनुरोध किया कि मामले की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए भारत और कनाडा के सीमा शुल्क (कस्टम) विभागों से संबंधित कस्टम क्लीयरेंस रिकॉर्ड प्राप्त कर उनकी जांच कराई जाए, ताकि घटनाक्रम पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

