प्राकृतिक खेती विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तंभ – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

देश पंजाब

चंडीगढ़, 8 जुलाई- आज तक आमने सामने

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज एक बड़ा ऐलान किया है, उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटी बनाई जाएगी, यह कमेटी हर जिला में होगी। इस कमेटी का मुख्य कार्य किसानों से संपर्क करना, उनके फार्म पर जाना और सरकार से सामंजस्य करवाकर प्राकृतिक खेती के साथ जोड़ने का कार्य होगा। यह एक तरह से प्राकृतिक खेती के प्रेरक एम्बेस्डर होंगे।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी बुधवार को पंचकूला में हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती संवाद को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान किसानों से संवाद भी किया, मुख्यमंत्री ने किसानों से मिले सुझावों को जल्द पूरा करवाने की दिशा में काम करने का आश्वासन भी दिया। साथ ही उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती करने वाले जिन किसानों ने गाय खरीदने के लिए सब्सिडी के लिए आवेदन किया है, उन्हें सब्सिडी जारी कर दी जाए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती करने का एक तरीका नहीं, बल्कि किसान, प्रकृति और समाज के बीच टूट चुके संबंधों को फिर से मजबूत करने का अभियान है। यह धरती माता की सेवा, खेती की लागत कम करने, जल और मिट्टी के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का माध्यम है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती के ब्रांड एंबेसडर बनने का आह्वान करते हुए कहा कि अब केवल चिंतन नहीं, बल्कि अमल करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का समय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समय-समय पर किसानों से सीधा संवाद करेगी और प्राकृतिक खेती के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती पर प्रत्येक माह इसी प्रकार के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बड़े सेमिनारों में गुजरात के राज्यपाल आचार्य श्री देवव्रत को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि किसान उनके अनुभवों से लाभान्वित हो सकें।

उन्होंने कहा कि आज का सेमिनार केवल प्राकृतिक खेती की तकनीक सीखने का अवसर नहीं है, बल्कि किसान और प्रकृति के बीच सदियों पुराने अटूट रिश्ते को फिर से मजबूत करने का अभियान है। पहले खेती का संबंध धरती माता और गौ माता से था। यही संबंध किसान के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लेकर आता था, लेकिन समय के साथ यह रिश्ता कमजोर हुआ और आज प्राकृतिक आपदाएं तथा पर्यावरणीय संकट हमारे सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव ने विकास तो किया है, लेकिन कहीं न कहीं धरती का अत्यधिक दोहन भी किया है। आज सवाल यह नहीं है कि खाद और कीटनाशकों की कमी है, बल्कि यह है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी धरती और कैसा पर्यावरण छोड़कर जा रहे हैं। हमारे पूर्वज हमें भरपूर भूजल और उपजाऊ मिट्टी देकर गए थे, लेकिन आज कई क्षेत्रों में भूजल स्तर हर सीजन में 20 से 25 फुट तक नीचे जा रहा है। इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पहले श्रमिक मंडियों में अनाज की भारी-भरकम बोरियां आसानी से उठा लेते थे, लेकिन आज बदलती जीवनशैली, रासायनिक खेती और प्राकृतिक असंतुलन के कारण सभी के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसलिए खेती की दिशा बदलना समय की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि प्राकृतिक खेती 21वीं सदी की आवश्यकता है। यह केवल खेती की नई पद्धति नहीं, बल्कि धरती बचाने का अभियान है। यह किसानों की लागत कम करने, पर्यावरण संरक्षण करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध भारत बनाने का माध्यम है। भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है और उसकी सेवा करना हम सभी का कर्तव्य है।

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